कुछ बातें और शरारतें बेटी की।
बेटी का बचपन यूँ तो अभी बच्ची है पर बातें दादी माँ सी करती है। जब कभी कुछ नया देखती है सवालों की झड़ी लगा देती है। सूरज बाबा संग मुस्कराती जागती है उठते ही बस दूध, पापे माँगती है। जिद करे तो जिददी कहलाए ना करे तो घर खाने को आए। गानों की शौकीन कभी "होल...
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सुशील कुमार छौक्कर
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[12 Apr 2009 23:49 PM]



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