लोकतंत्र का सर्कस - जय हो

जोशी कविराय  - Joshi Kavirai डेमोक्रेसी वाले नीले आसमानों के तले नेता और लाला जी बस दो ही तो फले । जय हो । सावन में बाढ़ आए या पड़े सूखा हर हालत जनसेवक तो कमाई करे । जय हो । फूट डालें जात, धर्म, प्रान्त के लिए राष्ट्रीय एकता की बातें पर करें । जय हो । हमला हो, बाढ़, सूखा, बेकारी... [पूरी पोस्ट]
writer joshi kavirai

व्यंग्य

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[12 Apr 2009 21:06 PM]

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