चाँद को चख के देख लेना ज़रा...
जब कभी भी रातों को तुम अकेले हो कोई बेचैनी जब करवटें बदलने लगे चाँद को चख के देख लेना ज़रा अगर मीठा लगे और चांदनी का दिल धडके समझ लेना कि मैं हूँ तुम्हारे पास कहीं यकीन न हो तो साँसे ज़रा आहिस्ता लो मेरी साँसों को खुद कि साँसों में घुला पाओगे...
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Jyotsna Pandey
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[12 Apr 2009 10:51 AM]



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