ज्योति कैसे जलेगी जलाए बिना

bhardwaj'sblog दीप को वर्तिका से मिलाए बिना; ज्योति कैसे जलेगी जलाए बिना। स्वप्न आकार लेगें भला किस तरह, हौसलों को अगन में गलाए बिना। ज़िन्दगी में चटक रंग कब भर सके, सोये अरमान के कुलबुलाए बिना। एक तारा कभी टूटता ही नहीं, दूर आकाश में खिलखिलाए बिना। प्यार का अर्थ आ... [पूरी पोस्ट]
writer chandrabhan bhardwaj
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[12 Apr 2009 06:26 AM]

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