छंद प्रसंग
छंदप्रसंग के आदर्श:आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री डॉ. भारतेन्दु मिश्र सब अपनी अपनी कहते है। कोई न किसी की सुनता है ,नाहक कोई सिर धुनता है दिल बहलाने को चल फिर कर,फिर सब अपने में रहते है। सबके सिर पर है भार प्रचुर,सबका हारा बेचारा उर अब ऊपर ही ऊपर हँसते,भ...
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भारतेंदु मिश्र
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[11 Apr 2009 23:16 PM]



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