जोशी कविराय - Joshi Kavirai
१) वे जो करें बिहार में झारखण्ड में आप । राजनीति में भोगते सभी यही संताप ॥ सभी यही संताप, राज के खेल निराले । यहाँ नहीं होते कोई भी भोले-भाले ॥ कह जोशीकविराय उन्हें बस कुर्सी दीखे । वो हैं लोमड़-बाघ, और हम भेड़ सरीखे ॥ (२) कांग्रेस में मची है अद्भुत...
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joshi kavirai
व्यंग्य
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[11 Apr 2009 12:37 PM]



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