लोकतंत्र का सर्कस - १

जोशी कविराय  - Joshi Kavirai १) अपना मानेंगें किसे, किसका हो विश्वास । छोड़ सोनिया को भगे, लालू, रामविलास ॥ लालू रामविलास, जिधर जब घास दिखेगी । मौसेरे भाइयों की जोड़ी वहीं मिलेगी ॥ कह जोशी कविराय लोग, दल आते-जाते । नहीं किसी का कोई सब मतलब के नाते ॥ (२) वरुण फँस गए झाड़कर भड़काऊ स... [पूरी पोस्ट]
writer joshi kavirai
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[11 Apr 2009 12:25 PM]

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