विष्णु प्रभाकर

अमरेन्द्र कुमार - हिन्दी राइटर्स गिल्ड कोई सुबह या शाम या फिर कोई घडी क्या खबर लेकर हमारे पास आयेगी, हमें पता नहीं होता। हम जीवन भर इसी अंधियारे में भटकते रहते हैं। इस अंधेरी गुफा में कहीं कुछ जब चमक कर बुझ जाता है तो हमें लगता है कि हमने क्या खो दिया और फिर अहसास भी होता है कि जो खो दिया... [पूरी पोस्ट]
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[11 Apr 2009 12:18 PM]

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