शिद्दत......
लिखा नसीब का आज मेरी नज़रों के सामने है आया वो दिल भी तड़पा याद में था जिसने मुझे भुलाया जब मेरा दिल राह भूला जिंदगी भी ख़ुद से बिछड़ी मैंने मंजिल की राह पायी जब वो रहनुमा बन के आया आज गहराइयों से दिल की तुमको आवाज मैंने दी है दीद की आरजू ने तुमको महफि...
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Shikha Deepak
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[11 Apr 2009 11:48 AM]



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