पहाड़
पहाड़ / जब भी धूसर से नज़र आते हैं सोचता हूं / किसने किया ये सब ? किसने काटे पेड़ ? किसने हिलाए पहाड़ ? किसने मोड़ दिए नदियों के रास्ते ? एक दिन में नहीं हुआ / ये सब सबने थोड़ा-थोड़ा कुरेदा है इनको फिर दरक गए पहाड़ जहां कभी हरियाली थी आज धूसर उदासी ह...
[पूरी पोस्ट]
जितेंद्र भट्ट
मेरी रचना
44
4
0
4
4
[11 Apr 2009 10:25 AM]



Shuffle








