चालीस करोड़ों को हिमालय ने पुकारा
चालीस करोड़ों को हिमालय ने पुकाराहोजाय पराधिन नहीं गंग की धारागंगा के किनारों को शिवालय ने पुकाराहम भाई समझते जिसे दुनियां में उलझ केवह घेर रहा आज हमें वैरी समझ केचोरी भी करे और करे बात गरज केबर्फों मे पिघलने को चला लाल सिताराचालीस करोड़ों को हिमालय...
[पूरी पोस्ट]
Bijen Salam
20
0
0
0
1
[11 Apr 2009 04:38 AM]



Shuffle








