एक कर्मचारी का विदाई समारोह

मीमांसिकी चमक रहा है उसकी आंखों का खालीपन सेवाकाल के अंत पर आयोजित उत्सव में बुलाया गया है संगमरमरी सीढ़ियों कालीनों बिछे गलियारों से लकदक सुसज्जित सभ्य-सभागार में लाया गया है चकित चैधियायी आंखों से अपनी ही देख रहा है वह बधस्थल पर लाए गए बकरे-सा होता हुआ अपना ह... [पूरी पोस्ट]
writer कपिलदेव
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[11 Apr 2009 01:32 AM]

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