एक कर्मचारी का विदाई समारोह
चमक रहा है उसकी आंखों का खालीपन सेवाकाल के अंत पर आयोजित उत्सव में बुलाया गया है संगमरमरी सीढ़ियों कालीनों बिछे गलियारों से लकदक सुसज्जित सभ्य-सभागार में लाया गया है चकित चैधियायी आंखों से अपनी ही देख रहा है वह बधस्थल पर लाए गए बकरे-सा होता हुआ अपना ह...
[पूरी पोस्ट]
कपिलदेव
24
0
0
0
3
[11 Apr 2009 01:32 AM]



Shuffle








