कहाँ थे तुम ?
कहाँ थे तुम जब पुकारा था तुम्हें मेरे दर्द ने ? कहाँ थे तुम जब दिन भर ये नम आँखे हर किसी सूरजमुखी कि पंखुडी टटोल रही थी , हर गली -हर मकान के मुंडेरों पर घुटनों के बल चल चल मेरी हर सांस तुम्हारी ही किसी छूट गयी परछाईं कि टोह में इधर उधर डोल रही थी......
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सागर
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[10 Apr 2009 19:49 PM]



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