क्यों है ग़ालिब का अंदाज़-ए-बयां और?

आज़ाद लब किसी ने आपसे ये कहा है क्या कि रोग़न किया कीजिये? ये तो शौक की बात है कि आप रोग़न करेंगे या सिर्फ रंग भरके रह जायेंगे... या रंग-रोग़न कोई रोग है? लोग कहते आये हैं कि ग़ालिब का है अंदाज़-ए-बयाँ और. ये तस्लीम भी किया गया है. आप फ़ाइलून और मफ़ाइलून के चक्कर... [पूरी पोस्ट]
writer विजयशंकर चतुर्वेदी
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[10 Apr 2009 17:48 PM]

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