आदमी क्‍या है एक जोडी जूता है़

जो देखा सो लिखा आदमी क्‍या है एक जोडी जूता है़ कोई आदमी जूते की नाप से बाहर नही है जूते मारने के सिलसिले की शुरूआत भी यही से होती है चाहे वो राष्‍ट्रपति हो या गली का बच्‍चा, जूते की मार पड ही रही है ये जूता आदमी के नाप का ही है जिसे जूते नही पडे शायद उसे अपने जूते क... [पूरी पोस्ट]
writer jitendra
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[10 Apr 2009 09:00 AM]

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