अंदाज़ अपना-अपना

anubhav प्यार की प्यास तो दोनो को थी एक अतृप्त हो भटकता रहा एक ने अपनी मंज़िल पा ली रिश्तों के मरूस्थल दोनो की राहों में थे एक सूखी रेत से टकराता रहा एक ने स्नेह की गागर छलका ली। मर्यादाओं के काँटे दोनो के जीवन में थे एक बबूल बन चुभता रहा एक ने फूलों से डाल स... [पूरी पोस्ट]
writer शोभा
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[10 Apr 2009 07:50 AM]

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