अंदाज़ अपना-अपना
प्यार की प्यास तो दोनो को थी एक अतृप्त हो भटकता रहा एक ने अपनी मंज़िल पा ली रिश्तों के मरूस्थल दोनो की राहों में थे एक सूखी रेत से टकराता रहा एक ने स्नेह की गागर छलका ली। मर्यादाओं के काँटे दोनो के जीवन में थे एक बबूल बन चुभता रहा एक ने फूलों से डाल स...
[पूरी पोस्ट]
शोभा
33
4
0
4
9
[10 Apr 2009 07:50 AM]



Shuffle








