अक्षर......जो भीतर में उतर आते हैं.......

मेरे आस-पास वो है ` और ´वो था,` इसके बीच का फासला केवल दुनिया का बनाया हुआ है, मोहब्बत करने वाले यह फासला नहीं मानते हैं........... दिल की मिट्टी में जब किसी का नाम अंकुरित हो जाता है.........जब उसकी पहचान पनप जाती है तो पेड़ की ‘ााखा कटने के बाद भी सलामत रहती है... [पूरी पोस्ट]
writer MANVINDER BHIMBER
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[10 Apr 2009 05:35 AM]

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