ज़रा ठहर जाओ
अभी चराग़ जले हैं ज़रा ठहर जाओ दिल-ए-नादान मिले हैं ज़रा ठहर जाओ गुल-ए-गुलज़ार हुई है यहाँ की हर टहनी कई गुलाब खिले हैं ज़रा ठहर जाओ | पड़े हुए हैं मेरे बोसे तेरी राहों में कदम संभाल के रखो ज़रा ठहर जाओ तिरे ख्वाबों से हर एक खार को हटा दूँगा उनकी ताब...
[पूरी पोस्ट]
अभिषेक'शफक़'
35
9
0
9
8
[10 Apr 2009 02:43 AM]



Shuffle








