लालटेन,ढ़िबरी, चिमनी फ़िर याद आई
नरेन्द्र गौड़ का शब्द संसार जीवन से दूर जाती ज़िन्दगानी का मार्मिक वृतांत है । जब ज़िन्दगी से एहसास गुम होने लगते हैं और आनंद-उल्हास के पल-छिन मुरझाने से लगते हैं , तब नरेन्द्र के शब्द उन पर बारिश की पहली फ़ुहार से पड़कर नई जान फ़ूँक देते है , ऊर्जा से भर...
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sareetha
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[09 Apr 2009 23:33 PM]



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