बलि पथ के सुंदर प्राण
बलि पथ के सुंदर प्राण | बलि होना धर्म तुम्हारा, जीवन हित क्यों पय पान || आज खडा तू मंदिर आगे, देव पुरुष के है भाग्य जागे | टूट रहे है जग के धागे || मत मांग अभय वरदान ||१|| जीवन है कर्तव्य की कहानी, चंद दिनों की मस्त जवानी | मर कर चख ले रे अज्ञानी ||...
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.राजुल शेखावत
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[09 Apr 2009 20:29 PM]



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