जूते गुजरात पर भी चले और इस नजीर को सलाम भी करें

मैत्री अहमदाबाद के निकट कोहा गांव के धूराजी और बाबूबेन ठाकुर को शायद आपमें से कोई नहीं जानता हो। लेकिन इन दोनों ने आजाद भारत के सबसे दुखद दिनों में मानवता को बचाकर एक मिशाल पेश की है। गुजरात में 2002 में हुए एकतरफा जनसंहार के हालात पर अंग्रेजी में पुस्तक ‍"... [पूरी पोस्ट]
writer अतुल
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[09 Apr 2009 12:47 PM]

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