खो गया है दिल इन कविताओं की तरह....
माफ करना देखकर हुस्न तेरा ग़र हो जाऊं शायर-दीवाना तो माफ करना। बंधके खिंचा चला आऊं तेरे सदके पे बार-बार तो माफ करना। हो जाए ग़र इश्क तुझे हौले-हौले मुझसे तो माफ करना। उड़ जाए नींद रातों की तेरी ग़र मुझसे तो माफ करना। बेचैन है ये दिल-ए-नादां ग़र थाम ल...
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मिथिलेश श्रीवास्तव
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[09 Apr 2009 12:37 PM]



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