सस्ता शेर के लिएइंतखाब के नवाब
देख लीजिये फिर ये जनाब आये हैं साथ अपने पांच साला इंकलाब लाये हैं रोटी की शिकायत क्या खाक करते हैं ये तो फिरंगी जूस का सैलाब लाये हैं आपको फुर्सत नहीं ढाई आखर पढ़ने की ये आलमी भाईचारे का किताब लाये हैं जुल्म-सितम की अब कभी बात न होगी ये अमन-ओ-चैन...
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इरफ़ान
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[09 Apr 2009 10:24 AM]



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