कहां गई मेरी कविताएँ....!
पिछले कई महीनों से कविताएँ लिखना बिल्कुल बंद है....अब तक जो लिखी हैं वो कम से कम ब्लॉग पर प्रकाशित कर दूं, यही सोचके लिख रहा हूं ) १ काश ! क्या कहूं क्या ना कहूं इस व्यथित उर की व्यथा, सोचता हूं काश ! मैं भ्रमर होता इठलाता फूलों के मुख पर कह देता मन...
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मिथिलेश श्रीवास्तव
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[09 Apr 2009 10:06 AM]



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