त्रस्त है लोकतंत्र
वोट मांगने के लिए निकल पड़ी है..... नेताओं की जमात... सफ़ेद कुरते-पायजामे में लम्बी कारों में नतमस्तक हर दरवाज़े पर रुकता है उनका कारवां पूरब से पश्चिम से उत्तर से दक्खिन से आकर हर जगह धुल ही धुल नज़र आता है और कलरव। कोलाहल में मुद्दे खो जाते हैं गरीब, म...
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[09 Apr 2009 09:46 AM]



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