विदा

अनहद नाद अशोक वाजपेयी की एक कविता विदा तुम चले जाओगे पर थोड़ा-सा यहाँ भी रह जाओगे जैसे रह जाती है पहली बारिश के बाद हवा में धरती की सोंधी-सी गंध भोर के उजास में थोड़ा-सा चंद्रमा खंडहर हो रहे मंदिर में अनसुनी प्राचीन नूपुरों की झंकार तुम चले जाओगे पर थोड़ी-सी... [पूरी पोस्ट]
writer PRIYANKAR
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[09 Apr 2009 09:44 AM]

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