और जूते मारो....एक से कुछ नहीं होने वाला...तब तक मारो जब तक सुधर न जाएं...
जूता मारो स्सालों को....एक जूते से कुछ नहीं होने वाला, जूतों की माला पहना दो...ये सब के सब इसी लायक हैं...'' कुछ ऐसा ही कहना चाहते हैं सिख समुदाय के उत्तेजित लोग। और सरकार उनकी नाराजगी प्रेशर कुकर की तरह टाइटलर का टिकट काटकर कुछ देर के लिए निकाल देना...
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मिथिलेश श्रीवास्तव
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[09 Apr 2009 04:13 AM]



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