दहलीज पर खड़ा इंसान ....
दोस्त ! तुमने ख़त तो लिखा था पर दुनिया की मार्फत डाला और दोस्त ! मोहब्बत का ख़त जो धरती के माप का होता है जो अम्बर के माप का होता है वह दुनिया वालों से पकड़ कर एक कौम जितना क़तर डाला कौम के नाप का कर डाला और फिर शहर में चर्चा हुई वह तेरा ख़त जो मेरे न...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[09 Apr 2009 03:35 AM]



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