निश्चित और अनिश्चित
फिर एक धमाका और फिर वही चीख-चीत्कार फिर वही जगह। सब कुछ अब निश्चित होता चला जा रहा है। आतंकियों ने सब कुछ निश्चित कर दिया है कि बम धमाके भी होंगे, लोगों की जान भी जाएगी. जगह भी निश्चित है. कभी दिल्ली, कभी मुंबई, कभी बंगलुरु और कभी असम. गर कुछ अनिश्चि...
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अवाम
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[09 Apr 2009 03:01 AM]



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