गजल -- दिन निकले भी जब उसको सोया ही देखा है --वीनस केसरी
दिन निकले भी जब उसको सोया ही देखा है तुमने सिक्के को केवल आधा ही देखा है तुम कैसे कह सकते हो वो कैसा है लिखता तुमने तो अब तक केवल मतला ही देखा है जाने कैसा हुस्न छिपा था आखिर चिलमन में हमने तो जब भी देखा बुरका ही देखा है वीनस ऊंचाई को छू कर सच ये म...
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venus kesari
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[08 Apr 2009 15:19 PM]



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