दिसम्बर की उन रातों में...

खामोश पहलू ... इस बार ज्यादा नहीं.. बस कुछ बिखरे ख्यालों को तरतीब देने की कोशिश की थी कभी.. उन्ही को पेश कर रहा हूँ.. दिसम्बर की उन रातों में चुपके से तुम.. दुनिया की नज़रों से छिपाकर अपने घर के आउट हाउस में.. एक अख़बार के लिहाफ में आलू के पराठे और उस छोटे से फ्लास... [पूरी पोस्ट]
writer Ketan Kanaujia
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[08 Apr 2009 12:43 PM]

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