भाई मेरे घर साथ न ले

अनहद नाद मुहम्मद अल्वी की एक और गज़ल भाई मिरे घर साथ न ले जंगल में डर साथ न ले भीगी आंखें छोड़ यहीं ! देख ये मंजर साथ न ले यादें पत्थर होती हैं मूरख पत्थर साथ न ले नींद यहीं रह जानी है तकिया चादर साथ न ले चुल्लू भर पानी के लिए सात समंदर साथ न ले एक अकेला भाग नि... [पूरी पोस्ट]
writer PRIYANKAR
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[08 Apr 2009 06:10 AM]

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