पिता...तुम हो आस-पास हमारे....
पिता...तुम हो हमारे आस-पास महाबोधि वृक्ष थे तुम जिसकी छाया में पनपी ये साधारण काया हमारी हथेलियों की रेखाओं में बसी है , तुम्हारी कर्मठ ऊर्जा की गर्माहट, महकता है तुम्हारा चेहरा अब भी केया गंध सा हमारे बचपन की सौंधी शरारतों में मीठी मुस्कराहटों में.....
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Vidhu
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[08 Apr 2009 05:49 AM]



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