इश्क़

अशांत महासागर न जीण दी सुध न मरण दी चाह इह इश्क़ बड़ा है बेपरवाह इह वसिया मेरी रूह दे अंदर जो डंगदा है मैनूं हर साह न इश्क़ दी है कोई जात पात है इश्क़ दा रब्ब इश्क़ ही आप जा इश्क़ नहा जा इश्क़ ही पा जा इश्क़ कमा जा इश्क़ ही खा जे बुल्लिया तूं इश्क़ न करदा रहिंदा व... [पूरी पोस्ट]
writer vijaymaudgill
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[08 Apr 2009 05:37 AM]

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