हुस्न हाजिर है
हुस्न हाजिर है मुहब्बत की सजा पाने को। पर ये पंक्तियां सुनकर सजा देने के लिए बढ़े पांव जड़ हो जाते हैं। मुझे लगता है... अरे कहां मैं अपनी बात सुनाने में लग गया ! मेरे लगने को मारें गोली, आपको क्या लगता है यह जरू बताएं... अनुराग अन्वषी जिरह संवाद का त...
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अनुराग अन्वेषी
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[08 Apr 2009 03:41 AM]



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