कान की बालियों का माला में पिरोया जाना फिर टूट के बिखर जाना

निठल्ला चिन्तन माइक्रो पोस्ट के रूप में एक छुटपुट विचारः कान की बालियाँ (या बुंदें) तो आपने देखी होंगी, दोनों कानों में अलग-अलग रहती हैं। (ईकोनामी के) ग्लोबलाईजेशन से पहले लगभग हर देश की ईकोनॉमी कुछ ऐसी ही थी, फिर बालियाँ माला में पिरोयी गयी यानि ईकोनॉमी एक दूसरे स... [पूरी पोस्ट]
writer Tarun
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[07 Apr 2009 20:27 PM]

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