कल शाम सूरज मेरे घर में था

प्रेम जनमेजय आप सब लोग उगते सूरज को भलि भांति जानते होंगें जो रोज सुबह आपके दरवाजे पर दस्तक देता है आपको अहसास दिलाता है कि सुबह हो गई और आप कर्मशील हो जाएं। मैं उस सूरज को भी जानता हूं जो अपनी कर्मशीलता के चलते आपकोे संवेदनशील अहसास दिलाता है और किसी भी शाम को उ... [पूरी पोस्ट]
writer प्रेम जनमेजय
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[07 Apr 2009 20:07 PM]

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