तुम गीत हो...
तुम गीत हो... तुम्हें मैंने नहीं लिखा, खुद लिख गए तुम, हर्फ-हर्फ अपने आप... मैंने तुम्हें नहीं गाया, तुम खुद रहे जुबान पर, मीठी-मीठी लोरी से... मैं बेसुरा था, तुम खुद बन गए सरगम, और निकलते रहे मेरी जुबान से... तुम गीत हो, वियोग का... जिसने मुझे सिखाय...
[पूरी पोस्ट]
देवेश वशिष्ठ ' खबरी '
32
2
0
2
3
[07 Apr 2009 16:53 PM]



Shuffle








