तुम गीत हो...

श्री कृष्णम् समर्पयामी तुम गीत हो... तुम्हें मैंने नहीं लिखा, खुद लिख गए तुम, हर्फ-हर्फ अपने आप... मैंने तुम्हें नहीं गाया, तुम खुद रहे जुबान पर, मीठी-मीठी लोरी से... मैं बेसुरा था, तुम खुद बन गए सरगम, और निकलते रहे मेरी जुबान से... तुम गीत हो, वियोग का... जिसने मुझे सिखाय... [पूरी पोस्ट]
writer देवेश वशिष्ठ ' खबरी '
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[07 Apr 2009 16:53 PM]

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