हाँ माँ तुम ही हो
यह छोटी सी कृति मेरी माँ के जन्मदिन पर लिख रहा हूँ... बस अपने भावों को कुछ शब्द देने की कोशिश कर रहा हूँ... बहुत मुश्किल है उस अन्दर छुपे अनंत भाव को शब्दों में बदलना... बस एक कोशिश है... सूरज की गर्मी और भव्यता हो तुम आसमान की नीलाई और विशालता हो तु...
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Pratik Maheshwari
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[07 Apr 2009 15:25 PM]



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