मीमांसिकी
कपिलदेव गजल की किताब जो किताब के बाहर हेै इक चैकन्ना बडबोलापन तो है ही इन गजलो मे दम साधी आवाजें भी हैं,चुभ जाने वाला स्वर भी ‘‘किताब से बाहर‘‘ देवेन्द्र आर्यं का पहला गजल संग्रह है। हिन्दी में गजल का इतिहास बहुत पुराना नही है। शमशेर और मुक्तिवोध की...
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कपिलदेव
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[07 Apr 2009 15:01 PM]



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