गहरे-हल्के,कितने सदमे
अपने सबसे अच्छे नगमे, तेरे लिए मैंने लिखे ।आँख के पानी पे सपने, तेरे लिए मैंने लिखे ।रात दिन मेरे साथ चलने की ना जिद कर जिंदगीराहे -वफ़ा के आईने , तेरे लिए मैंने लिखे ।उसे फ़िक्र हो मेरी यूँ न था,लेकिन मुझे कहता रहागहरे-हल्के,कितने सदमे तेरे लिए मैंने...
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naturica
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[07 Apr 2009 11:31 AM]



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