"कुश की कलम"
दस पैतालीस की आखिरी मेट्रो थी.. द्वारका से इन्द्रप्रस्थ की तरफ जा रहा था.. कैब आई नहीं थी तो मेट्रो ही लास्ट आप्शन था.. मैं ट्रेन में जाकर बैठ गया.. हाथ में राहेजा की किताब 'एनिथिंग फॉर यु मेम थी.' मैं किताब पढ़ रहा था.. जनकपुरी स्टेशन आया ट्रेन रुकी...
[पूरी पोस्ट]
कुश
61
11
0
11
25
[07 Apr 2009 09:09 AM]



Shuffle








