मीमांसिकी
समय से संवाद की जिज्ञासा ः शब्दों में समय एक युवा कवि के रूप में पहचान बना चुके जितेन्द्र श्रीवास्तव ने कविता के साथ साथ आलोचना के क्षेत्र में भी अपनी लगातार उपस्थिति दर्ज कराई है। उनकी दो आलोचना पुस्तकों - भारतीय समाज की समस्याएं और प्रेमचंद तथा भार...
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कपिलदेव
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[07 Apr 2009 04:07 AM]



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