varsha
ऐसा लगता है हम सब सोते रहते हैं, कुंभकरण सरीखे, कभी-कभी जागते हैं, दिल में कुछ-कुछ चीजें हिलोरे मारती हैं, फिर रोज के कामों में खटती मशीनों की तरह सो जाते हैं, खुली आंखों के साथ। हमारे दिलों में जलती आग भी बुझ गई है। आग...अगर ये जलती रहे, तो घास भी ब...
[पूरी पोस्ट]
वर्षा
27
1
0
1
0
[07 Apr 2009 02:29 AM]



Shuffle








