सिकहर पर दही निकाह भया सही

राही मासूम रज़ा का साहित्य राही मासूम रजा मीर जामिन अली बड़े ठाठ के जमींदार थे। जमींदारी बहुत बड़ी नहीं थी। परन्तु रोब बहुत था। क्योंकि दख्ल और बेदख्ली का जादू चलाने में उन का जवाब नहीं था। मीर साहब ने उस्ताद लायक अली से गाने के सबक लिये थे और ईमान की बात यह है कि खूब गाते थे। स... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[06 Apr 2009 18:35 PM]

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