राजकमल, वे तुम्हारी ओट से झांक रहे हैं
सिर्फ अपनी बीवी और सिर्फ अपनी दो सौ चालीस की नौकरी बांधती थी उसे अपने नागरिक व्यूह में राजकमल चौधरी माफी चाहूंगा. लंबा अरसा हुआ आपसे मुखातिब नहीं हुआ. अखबारी जिम्मेदारी और निजी वजुहात कई बार दिली काम पर हावी हो जाती हैं. न चाहते हुए भी हम उस तरफ बहे...
[पूरी पोस्ट]
सचिन ..........
19
2
0
2
3
[06 Apr 2009 11:30 AM]



Shuffle








