मुहम्मद अल्वी की एक गज़ल

अनहद नाद गज़ल अदब की रानी है एक आंख से कानी है गज़ल अदब की रानी है खुशी बिदेसी है तो क्या गम तो हिंदुस्तानी है बन्दर अपना दादा है बिल्ली शेर की नानी है अबके दिसम्बर में सर्दी दिल्ली से मंगवानी है मार्च में थोड़ी-सी गर्मी शिमला पर भिजवानी है रेत ही रेत जमीं पर है... [पूरी पोस्ट]
writer PRIYANKAR
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[06 Apr 2009 07:07 AM]

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