शोकपत्र के ऊपर
ऊपर-ऊपर मुस्कानें हैं भीतर-भीतर ग़म जैसे शोकपत्र के ऊपर शादी का अलबम। समय-मछेरे के हाथों का थैला है जीवन जिसमें जिंदा मछली जैसा उछल रहा है मन भीतर-भीतर कई मरण हैं ऊपर कई जनम जैसे शोकपत्र के ऊपर शादी का अलबम। अपना-अपना दृष्टिकोण है अपना-अपना मत लेकिन...
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डॉ० कुअँर बेचैन
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[06 Apr 2009 04:34 AM]



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