गांव अपना याद करता है
वो जिसकी गौनियों से तुम डले गुड़ के चुराते थे वो जिसके तास के बूरे में तुम फ़ंकी लगाते थे जो तुमसे बांटता था गोलियां चूरन की रोजाना वो जिसकी सायकिल हर शाम को तुम मांग लाते थे कभी तो लौट कर आओगे तुम ये बात करता है तुम्हें वो गांव का पप्पू पंसारी याद करत...
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Geetkaar
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[05 Apr 2009 21:22 PM]



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