एक जंग हुई थी कर्बला में

राही मासूम रज़ा का साहित्य राही मासूम रजा जैनब की आँखों में रास्ते की धूल थी, उसने अंगुलियों से आँखें मलीं ... हां, सामने मदीना ही था। नाना मुहम्मद का मदीना। जैनब की आँखें भर आयीं, लेकिन रोना किसलिए ? बग़ल वाले महमिल का पर्दा उठाये कुलसूम का मर्सिया झांक रहा था : ऐ नाना के मदीन... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[05 Apr 2009 18:22 PM]

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